न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) क्या होता है | फुल फॉर्म | MSP Explained in Hindi

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से सम्बंधित जानकारी

पंजाब और हरियाणा के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के किसान पिछले कई महीनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए है| दरअसल केन्द्र सरकार सितंबर 2020 में 3 नये कृषि विधेयक ला चुकी है, जिन पर राष्ट्रपति की मुहर लगनें के पश्चात वह अब कानून बन चुके हैं परन्तु किसान इस नये कृषि कानून से सहमत नहीं है| किसानों का मानना है, सरकार इन नये कृषि कानून (New Farm Laws) बनानें के पीछे सरकार की मंशा न्यूनतम समर्थन मूल्य सिस्टम को समाप्त करना चाहती है|

किसानों और सरकार के बीच होनें वाले टकराव के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एक अहम् मुद्दा बन चुका है|  ऐसे में बहुत से लोगो के मन में यह प्रश्न उठता है, कि आखिर यह एमएसपी क्या होता है|  न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) क्या होता है, फुल फॉर्म के बारें में आपको यहाँ विधिवत पूरी जानकारी दी जा रही है|

एमएसपी का फुल फार्म क्या होता है (MSP Full Form)

MSP (एमएसपी) का फुल फार्म ‘Minimum Support Price’ (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) होता है, जबकि हिंदी भाषा में इसे ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ कहते है| सरकार द्वारा एमएसपी की घोषणा फसलों की बुवाई से ठीक पहले की जाती है| इससे उस वर्ष फसल का उत्पादन अधिक या कम होनें पर किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है।

MSP Full Form In EnglishMinimum Support Price
एमएसपी फुल फार्म इन हिंदीन्यूनतम समर्थन मूल्य

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) क्या होता है (What Is Minimum Support Price-MSP)

देश के किसानों को फसल उत्पादन के लिए कठोर परिश्रम करना पड़ता है| ऐसे में यदि किसी कारणवश उनकी फसल का उत्पादन कम या अधिक होनें पर उसका विक्रय करनें पर उनके मूल्य में उतार-चढ़ाव होता है| ऐसे में कुछ किसानों को काफी लाभ हो जाता है और कुछ किसानों का नुकसान भी हो जाता है| इस प्रकार की स्थितियों को देखते हुए सरकार नें किसानों को फसल उत्पादन के पश्चात उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचानें के लिए देश में एमएसपी की व्यवस्था लागू की है। न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी एक तरह से सरकार की तरफ से किसानों की फसलों के लिए गारंटी है, जिसे किसानों को उनकी फसल पर उपलब्ध करवाया जाता है।

एमएसपी के माध्यम से किसानों की फसलों की कीमत कम होने पर भी उनकी आय में कोई उतार-चढ़ाव नहीं आता है। दूसरे शब्दों में यदि किसानों को मंडियों में अपनी फसल के बेहतर दाम नहीं मिलते है, तो सरकार उस फसल को एमएसपी खरीदती है| मार्केट में फसलों की कीमत घटने ता बढ़ने पर प्रत्यक्ष रूप से इसका प्रभाव किसानों पर ना पड़े इसीलिए सरकार द्वारा किसानों की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता है।

एमएसपी लागू करनें का उद्देश्य (Objective Of Implementing MSP)

आपको बता दें, कि न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष फसलों की बुवाई से पहले ही निर्धारित का दिया जाता है| दरअसल सरकार द्वारा एमएसपी निर्धारित करनें का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाकर उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान करना है| अक्सर देखा जाता है, कि मार्केट में जिस वस्तु की अधिकता हो जाती है उस वस्तु का मूल्य काफी कम हो जाता है| लेकिन फसलों का एमएसपी निर्धारित होनें के पश्चात उस फसल की अधिकता या कमीं होनें की स्थिति में सरकार उस फसल को निर्धारित एमएसपी पर खरीदती है, जिससे किसानों की आय में कोई उतार-चढ़ाव नहीं होता है|  आपको बता दें कि पूरे देश में किसी फसल की एमएसपी एक ही होती है|

एमएसपी का निर्धारण कौन करता है (Who Determines The MSP)

देश में फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Cost and Prices- CACP) द्वारा किया जाता है| यह संस्था भारत के कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है| आपको बता दें, इस संस्था की स्थापना वर्ष 1965 में की गयी थी, उस समय इसका नाम कृषि मूल्य आयोग था| वर्ष 1985 में इसमें लागत शब्द जोड़ दिया गया, जिससे इसका नाम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग हो गया| यह संस्था कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture), आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs) और भारत सरकार के समक्ष अपने आंकड़े प्रस्तुत करती है| इन सभी से स्वीकृति मिलनें के पश्चात आयोग द्वारा अलग-अलग फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता है|

फसलों की एमएसपी कैसे तय होती है (How Is MSP Of Crops Determined)

फसलों की एमएसपी का आंकलन करनें के लिए कमीशन फॉर एग्रीकल्चरल कॉस्ट एंड प्राइसेस अर्थात सीएसीपी कृषि में लगनें वाली लागत को 3 भागों  A1, A2+FL और C2 में विभाजित किया जाता है| A2 के अंतर्गत किसानों द्वारा फसल उत्पादन में किये गये विभिन्न प्रकार के खर्च जैसे- बीज, खाद, ईंधन और सिंचाई आदि शामिल किये जाते है, जबकि A2+FL में नकद खर्च के साथ किसान और उसके पारिवारिक जनों द्वारा किये परिश्रम का अनुमानित मेहनताना भी जोड़ा जाता है।

C2 के अंतर्गत कृषि को व्यवसायिक दृष्टिकोण से देखा जाता है, इसमें कुल नकद खर्च के साथ-साथ कृषक के पारिवारिक पारिश्रामिक के अलावा जिस भूमि पर कृषि कार्य किया जा रहा है, उसका किराया और कृषि कार्य में लगनें वाली कुल धनराशि पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है। सीएसीपी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में फसलों की लागत के आधार पर निर्धारित किया जानें वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य ए2+एफएल है।

एमएसपी निर्धारित फसलों के नाम (MSP Determined Crops Names)

वर्तमान समय में सरकार के द्वारा 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता है| जिसमें से 7 प्रकार के अनाज, 7 तिलहन, 5 दलहन और 4 व्यवसायिक फसले शामिल है| धान, गेहूं, मक्का, जौ, बाजरा, चना, तुअर, मूंग, उड़द और मसूर, सरसों, सोयाबीन, सूरजमूखी, गन्ना, कपास और जूट के लिए एमएसपी निर्धारित किया जाता है| सरकार द्वारा फसलों के लिए निर्धारित एमएसपी की वर्षवार सूची इस प्रकार है-