अनानास की खेती कैसे होती है | Pineapple Farming in Hindi | अनानास की कीमत


अनानास की खेती (Pineapple Farming) से सम्बंधित जानकारी

अनानास की खेती फल के रूप में की जाती है, विश्व में ब्राज़ील को अनानास का जन्मदाता कहा जाता है | अनानास के फलो में अम्लीय गुणों की मात्रा अधिक पाई जाती है | इसके ताजे फल को कभी भी काटकर खाया जा सकता है | इसके फलो का तना काफी मोटा और गांठे अधिक मजबूत पाई जाती है, और तना पत्तियों से भरा होता है, इस तरह से यह पूरा एक गठीला फल है | अनानास में कई तरह से पोषक तत्व और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जिससे अनानास का सेवन करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है |

यह शरीर में पाए जाने वाले विषैले पदार्थो को भी बाहर निकालता है, इस तरह से यह एक औषधीय फल भी है| इसका नियमित रूप से सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है | इसके फलो को सीधे तौर पर खाने के अलावा सलाद, जूस, जैम, केक और जेली आदि के रूप में भी करते है | यदि आप भी अनानास की खेती करना चाहते है, तो इस पोस्ट में आपको अनानास की खेती कैसे होती है (Pineapple Farming in Hindi), तथा भारतीय बाजार में अनानास की कीमत कितनी है, इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है |

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अनानास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी जलवायु और तापमान (Pineapple Cultivation Suitable Soil, Climate and Temperature)

अनानास की खेती में अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है | इसकी खेती को जलभराव वाली भूमि में नहीं करना चाहिए | इसके अलावा भूमि का P.H. मान 5 से 6 के मध्य होना चाहिए | इसके पौधों को अच्छे से विकास करने के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है | सर्दियों के मौसम में गिरने वाला पाला इसके पौधों को अधिक हानि पहुंचाता है | इसके पौधों को अधिक बारिश की भी आवश्यकता नहीं होती है |

समुद्रतट से 1,000 से 1,200 मीटर की ऊंचाई पर इसकी खेती को आसानी से किया जा सकता है | अनानास के पौधे 20 डिग्री के तापमान पर अच्छे से अंकुरित होते है | इसके बाद इसके पौधों को विकास हेतु सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है | पौधों के विकास के समय इसके पौधे अधिकतम 35 डिग्री तापमान तो ही सहन कर सकते है, इससे अधिक का तापमान इसके पौधों के लिए हानिकारक होता है |

अनानास की उन्नत किस्में (Pineapple Improved Varieties)

अनानास की भी कई उन्नत किस्मों को तैयार किया गया है, जिन्हे कम समय में अधिक पैदावार देने के लिए उगाया जाता है | इन किस्मों की जानकारी कुछ इस प्रकार है –

जायनट क्यू

इस किस्म के पौधों में निकलने वाली पत्तियां लम्बी और चिकनी पाई जाती है | जायनट क्यू के पौधों में लगने वाला फल आकार में काफी बड़ा होता है, जिसका वजन तीन किलो के आसपास होता है | इस किस्म को अनानास की पछेती फसल के लिए उगाया जाता है | इस किस्म के पौधे रोपाई के 15 से 18 महीने बाद 80% तक पककर तैयार हो जाते है |

क्वीन

अनानास की यह किस्म कम समय में पैदावार देने के लिए उगाई जाती है | इसमें निकलने वाले पौधे आकार में छोटे होते है, जिसकी पत्तियां भी छोटे आकार की होती है | इसके फलों का सिरा दांतेदार होता है, जिसका रंग पीला और सुनहरा होता है | इस किस्म के फलों का गुदा स्वाद में काफी अच्छा होता है |

मॉरिशस

यह एक विदेशी किस्म है, जिसमे निकलने वाली पत्तियां दांतेदार होती है | इस किस्म के फलों को तैयार होने में एक वर्ष से अधिक का समय लग जाता है | जिसका वजन लगभग दो किलो तक का होता है |

रैड स्पैनिश

अनानास की इस किस्म में निकलने वाले फलों का बाहरी आवरण खुरदरा, कठोर, और रंग में पीला होता है | इसके फलों का आकार सामान्य होता है, जिसके गुदे में अम्लीय गुण पाया जाता है | इस किस्म के फलों को सेवन ताजा ही करना होता है, तथा इसमें बहुत ही कम रोग देखने को मिलते है |

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अनानास के खेत की तैयारी और उवर्रक की मात्रा (Pineapple Field Preparation and Fertilizer Quantity)

अनानास की फसल करने से पहले उसके खेत को अच्छी तरह से तैयार कर लेना चाहिए | इसके लिए सबसे पहले खेत की गहरी जुताई कर देनी चाहिए | जिससे खेत में मौजूद पुरानी फसल के अवशेष पूरी तरह से नष्ट हो जायेंगे | इसके बाद खेत को कुछ समय के लिए ऐसे ही खुला छोड़ दे | इससे खेत की मिट्टी में अच्छी तरह से धूप लग जाएगी | इसके बाद खेत में 15 से 17 पुरानी गोबर की खाद को डालकर मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए | खाद को मिट्टी में मिला देने के बाद कल्टीवेटर के माध्यम से दो से तीन तिरछी जुताई कर देनी चाहिए |

जुताई के बाद खेत में पानी लगाकर पलेव कर देना चाहिए | इसके बाद जब खेत की मिट्टी ऊपर से सूखी दिखाई देने लगे तब एक बार रोटावेटर की सहायता से ढेलों को तोड़ कर मिट्टी को भुरभुरा बना दे | मिट्टी के भुरभुरा हो जाने के बाद पाटा लगाकर चलवा दे, जिससे खेत समतल हो जायेगा | अनानास के पौधों को पर्याप्त मात्रा में उवर्रक देने के लिए पहली जुताई के बाद पुरानी गोबर की खाद डाली जाती है, जैविक खाद की जगह आप रासायनिक खाद का भी इस्तेमाल कर सकते है | इसके लिए खेत में  340 KG फास्फोरस, 680 KG अमोनियम सल्फेट तथा 680 KG पोटाश की मात्रा को वर्ष में दो बार दिया जाता है, इससे पौधों का विकास अच्छे से होता है |

अनानास के बीजो की रोपाई का सही समय और तरीका (Pineapple Seeds Right time and Method of Planting)

इसके पौधे को अनानास के पौधों पर बनने वाली शाखाओ पर तैयार किया जाता है | इन पौधों को पुत्तल (सकर), गुटी पुत्तल (स्लिप) और क्राउन आदि नाम से भी जानते है | इसकी सकर किस्म को जमीन में पत्तियों को हटाकर तैयार किया जाता है, तथा स्लिप को जमीन से निकलने वाली शाखाओ पर तैयार किया जाता है | क्राऊन को फलो पर बनने वाली शाखाओ पर तैयार करते है | इन सभी विधियों में लगाने से पहले उन्हें साफ कर उपचारित कर लिया जाता है | उपचारित करने के दौरान पौधों में लगने वाली सूखी पत्तियों को तोड़कर हटा दिया जाता है | इसके बाद बीजो को थिरम या सेरासेन के घोल से उपचारित करने के बाद धूप में सूखा लिया जाता है |

इसके बाद सकर से तैयार किये गए पौधों को लगा दिया जाता है | सकर द्वारा तैयार की गई फसल को फल देने में 15 महीने का समय लग जाता है | इसके अतिरिक्त स्लिप और क्राउन द्वारा लगाए गए पौधे रोपाई के 20 से 24 महीने बाद फल देना आरम्भ कर देते है | इसके बीजो की रोपाई के लिए खेत में मेड़ो को तैयार कर लिया जाता है, इन मेड़ो पर दो पंक्तियों को लगाते है | मेड़ से मेड़ के बीच की दूरी डेढ़ से दो फ़ीट की होनी चाहिए | अनानास के पौधों की रोपाई नम खेतो में की जाती है, इसलिए इसके बीजो की रोपाई के लिए बारिश का मौसम काफी उपयुक्त माना जाता है | नमी के दौरान बीजो की रोपाई से पौधों को अंकुरित होने के लिए पर्याप्त जलवायु मिल जाती है |

अनानास के पौधों की सिंचाई (Pineapple Plants Irrigation)

अनानास के पौधों को अधिक सिंचाई की जरूरत होती है | इसलिए बीजो की रोपाई के तुरंत बाद इसके पौधों की सिंचाई कर देनी चाहिए | इसके पौधों की सिंचाई के लिए धीमी बहाव या ड्रिप विधि का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे लगाए गए बीज बहे नहीं | अन्य मौसम में इसके पौधों को 20 से 22 दिन बाद सिंचाई की आवश्यकता होती है, वही बारिश के मौसम में जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई करनी चाहिए |

अनानास के पौधों में खरपतवार नियंत्रण (Pineapple Plants Weed Control)

अनानास के पौधों में खरपतवार नियंत्रण के लिए प्राकृतिक विधि का इस्तेमाल किया जाता है | इसके पौधों को चार से पाँच निराई – गुड़ाई की आवश्यकता होती है | इसकी पहली गुड़ाई को बीजो की रोपाई के 25 दिन बाद करना होता है | इसके बाद की गुड़ाई को भी पहली गुड़ाई के 25 दिन बाद ही करे |

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अनानास के पौधों में लगने वाले रोग एवं उनकी रोकथाम (Pineapple Plants Diseases and their Prevention)

शीर्ष विगलन

इस किस्म का रोग पौधों और फलो दोनों को ही प्रभावित करता है | शीर्ष विगलन रोग के प्रारंभिक आक्रमण से पौधा विकास करना बंद कर देता है | यदि इस तरह का रोग फल बनने के बाद लगता है तो यह रोग फलो को पूरी तरह से नष्ट कर देता है | इस रोग से बचाव के लिए पौधों पर नीम के तेल या काढ़े का छिड़काव किया जाता है |

जड़ गलन

अनानास के पौधे में लगने वाला रोग जलभराव की स्थिति में देखने को मिलता है | इस रोग के लग जाने से पौधा सूखकर पूरी तरह से नष्ट हो जाता है | अनानास के पौधों को इस रोग से बचाने के लिए खेत में जलभराव की स्थिति न होने दे, इसके अलावा पौधों पर बोर्डों मिश्रण का छिड़काव भी कर सकते है |

काला धब्बा

काला धब्बा रोग पौधों की पत्तियों पर दिखाई देता है | इस रोग से प्रभावित होने पर पौधे की पत्तियों पर भूरे और काले रंग के धब्बे पड़ जाते है | इस रोग से अधिक प्रभावित होने पर पौधा विकास करना पड़ता है | मैं कोजेब या नीम के तेल की उचित मात्रा का छिड़काव कर इस रोग की रोकथाम की जा सकती है |

अनानास के फलो की तुड़ाई, पैदावार और कीमत (Pineapple Fruit Harvesting, yield and Price)

अनानास के पौधे बीज रोपाई के तक़रीबन 18 से 20 महीने बाद फल देने के लिए तैयार हो जाते है | जब इसके पौधों में लगने वाली पत्तियाँ पीली दिखाई देने लगती है, तब इसके फलो की तुड़ाई कर लेनी चाहिए | फलो की तुड़ाई के बाद उन्हें एकत्रित कर उन्हें तुरंत बेचने के लिए बाजार में भेज देना चाहिए | अनानास के एक पौधे से केवल एक ही फल को प्राप्त किया जा सकता है, तथा एक हेक्टेयर के खेत में तक़रीबन 16 से 17 हज़ार अनानास के पौधों को लगा सकते है |

किसान भाई इससे एक हेक्टेयर के खेत में 300 से 400 क्विंटल की पैदावार प्राप्त कर सकते है | अनानास का बाज़ारी भाव काफी अच्छा होता है, जिससे किसान भाई इसकी एक बार की फसल से 5 से 6 लाख की आय आसानी से प्राप्त कर सकते है |

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