Aquaponics Farming in Hindi | एक्वापोनिक्स कृषि क्या होती है

एक्वापोनिक्स कृषि(Aquaponics Farming) से संबंधित जानकारी

हमारा देश भारत एक कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है | कृषि का देश की अर्थव्यवस्था में भी बहुत बड़ा योगदान है | दुनिया में सभ्यता के प्रारम्भ से ही खेती की जा रही है | क्योकि बिना किसी फसल को उगाये और खेती किये किसी भी अन्न की पैदावार नहीं की जा सकती | खेती को करने के लिए उपयुक्त मिट्टी,धूप,पानी और खाद की आवश्यकता होती है | बिना इस सामग्री का इस्तेमाल किये खेती को नहीं किया जा सकता है | इसमें पहले जमीन में पौधे या बीजो को लगाकर कुछ महीनो या सालो में फसल या पेड़ो को तैयार किया जाता है |

अब बदलते समय के साथ नई- नई तकनीकों का इस्तेमाल कर सब्जियों को मिट्टी  के अतिरिक्त पानी में भी उगाया जा सकता है | आज हम आपको ऐसी ही तकनीक के बारे में बताने जा रहे है जिसे “एक्वापोनिक्स” कहते है | आज इस एक्वापोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल कर कम पानी में अच्छी फसल को तैयार किया जा रहा है | यदि आप भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर खेती करना चाहते है | तो इस पोस्ट में आपको Aquaponics Farming in Hindi, एक्वापोनिक्स कृषि क्या होती है, इसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी जा रही है |

फसल किसे कहते हैं

एक्वापोनिक्स कृषि क्या होती है (Aquaponics Agriculture)

कई देशो में एक्वापोनिक्स खेती भिन्न-भिन्न स्थानों पर की जाती है, किन्तु भारत में एक्वापोनिक्स का फॉर्म बैंगलोर में स्थित है | यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे पहला फॉर्म है, जिसे माध्वी फॉर्म कहते है | इस एक्वापोनिक्स तकनीक में पानी के टैंको या छोटे तालाबों को तैयार किया जाता है, जिसमे मछलियों को रखते है | इन मछलियों के मल से पानी में उपस्थित अमोनियों (Ammonia) की मात्रा में वृद्धि होती है | इस पानी को तैयार किये गए टैंक के डाल देते है |

इस टैंक में मिट्टी की जगह प्राकृतिक फ़िल्टर को उपयोग में लाया जाता है, तथा पौधे मिट्टी की जगह पानी से आवश्यक पोषक तत्वों को सोखते है | इसके बाद इस पानी को मछलियों के टैंक में वापिस डाल देते है | यह क्रिया बार – बार दोहराई जाती है, जिससे जल की बर्बादी नहीं होती है | इस तकनीक के इस्तेमाल से फसल को मरुस्थल (Desert), लवणीलय (Saline), रेतीली (Sandy), बर्फीली (Snowy) जैसी जगहों पर आसानी से ऊगा सकते है |

इससे देश में स्थित लाखो हेक्टेयर बंजर भूमि को उपयोग में ला सकते है | इस तकनीक के इस्तेमाल से आजीविका (Livelihood) के साधन भी बढ़ेंगे तथा साधारण खेती की तुलना में एक्वापोनिक्स तकनीक के इस्तेमाल से 90% पानी की बचत होगी | इस तकनीक में फसल मिट्टी की फसल की तुलना में तीन गुना अधिक तेजी से बढ़ती है | यह प्रति स्क्वायर फ़ीट जैसी छोटी जगह में अधिक पैदावार देती है | यह पूरी तरह से जैविक खेती होती है, जिसमे मिट्टी की खेती के मुकाबले इस तकनीक का इस्तेमाल कर उगी फसल में 40% तक अधिक पोषक तत्व उपस्थित होते है | इसके अलावा मछलियों को उपभोग और आय के सृजन के उपयोग में भी कर सकते है |

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एक्वापोनिक्स कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी (Information About Aquaponics Krishi)

एक्वापोनिक्स (Aquaponics) पारिस्थितिकी रूप से एक स्थायी मॉडल है, जिसे एक्वाकल्चर (Aquaculture) के साथ हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics) को मिला कर उपयोग में लाया जाता है |

मुख्य तथ्य (Important Facts)

  • एक्वापोनिक्स तकनीक में एक ही पारिस्थितिकी-तंत्र में मछलियाँ और पौधे साथ – साथ वृद्धि करते है |
  • मछलियों के मल से पौधों को जैविक खाद प्राप्त होती है, जिससे जल की भी शुद्धि होती है, और एक संतुलित पारिस्थितिकी-तंत्र का निर्माण होता है |
  • तीसरा प्रतिभागी यानि सूक्ष्मजीव या नाइट्राइजिंग बैक्टीरिया मछलिया में उपस्थित अमोनिया को नाइट्रेट्स में परिवर्तित कर देता है | यह पौधों की वृद्धि के लिए काफी लाभदायक होता है |

हाइड्रोपोनिक्स विधि (Hydroponics)

  • इस हाइड्रोपोनिक्स विधि में पौधे मिट्टी के बिना जल में वृद्धि करते हैं, जहाँ मिट्टी को पानी द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।

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एक्वाकल्चर प्रणाली (Aquaculture System)

  • इस क्रिया में एक प्राकृतिक या कृत्रिम झील, ताज़े पानी वाले तालाब या समुद्र में उपयुक्त तकनीक एवं उपकरणों की आवश्यकता होती है |
  • इस तरह की खेती में जलीय जंतुओं जैसे- मछली एवं मोलस्क का विकास, कृत्रिम प्रजनन तथा संग्रहण का कार्य किया जाता है |
  • एक्वाकल्चर एक ही प्रजाति के जन्तुओ की मात्रा है जो मांस या उप-उत्पादों को उत्पादन के लिए सक्षम बनाता है |
  • मत्स्य पालन इसका एक श्रेष्ठ उदाहरण है |

एक्वापोनिक्स के लाभ (Benefits of Aquaponics)

  • अच्छी और अधिक पैदावार (सामान्य से 20-25% अधिक) तथा गुणात्मक उत्पादन।
  • वह भूमि जो कि कृषि योग्य नहीं है जैसे :- मरुस्थलीय, लवणीय, रेतीली, बर्फीली आदि को कृषि के उपयोग में लाया जा सकता है |
  • पौधों और मछलियों दोनों का ही उपभोग एवं आय के लिए किया जाता है |

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एक्वापोनिक्स कृषि की मिया

  • मृदा उत्पादन एवं  हाइड्रोपोनिक्स की तुलना में आरंभिक लागत काफी महंगी होती है |
  • इसमें मछली, बैक्टीरिया और पौधों की जानकारी का होना जरूरी होता है |
  • इसमें (17-34°C) तक तापमान की आवश्यकता होती है |
  • किसी तरह की गलती या छोटी दुर्घटना से सारा तंत्र नष्ट हो सकता है |
  • यदि एकल रूप (एक स्थान पर केवल एक एक्वापोनिक्स) को उपयोग में लाया गया तो एक्वापोनिक्स पूर्ण रूप से भोजन प्रदान नहीं कर पायेगा |

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नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)

  • सभी तरह के जीवो को जीवित रहने के लिए प्रथम पोषक तत्व के रूप में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है |
  • जीवित प्राणियों में कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के अतिरिक्त नाइट्रोजन को प्रमुख तत्व माना गया है |
  • नाइट्रोजन में एमीनो अम्लों, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्लों, वृद्धि नियंत्रकों, पर्णहरितों एवं बहुतायत जैसे अनेक विटामिनों का संघटक उपस्थित है। यह मृदा में उपस्थित सीमित नाइट्रोजन के लिये पादप सूक्ष्म जीवों की प्रतिस्पर्द्धा करते है अतः नाइट्रोजन प्राकृतिक एवं कृषि पारितंत्र के लिये जरूरी नियंत्रक पोषक तत्त्व है।
  • नाइट्रोजन गैस का रूपांतरण बड़ी मात्रा में इस क्रियाविधि के अनुसार किया जाता है:-
    • नाइट्रोजन स्थिरीकरण Nitrogen fixation (Nitrogen Gas to Ammonia)
    • नाइट्रोजनीकरण Nitrification (Ammonia to Nitrite and Nitrate)
    • विनाइट्रीकरण Denitrification (Nitrate to Nitrogen Gases)
  • नाइट्रोजन में दो नाइट्रोजन परमाणु आपस में त्रिसहसंयोजी (Trivalent) शक्तिशाली आबंध से जुड़े रहते है, N≡N नाइट्रोजन (N2) के अमोनिया में बदलने की प्रक्रिया को नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहते हैं।
  • प्राकृतिक बिजली के चमकने से और पराबैंगनी विकिरणों द्वारा नाइट्रोजन को नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) (Nitrogen Oxide) में बदलने के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है |
  • औद्योगिक दहन, जंगल में लगी आग, वाहनों का धुंआ तथा बिजली उत्पादन केंद्र भी वातावरणीय यह सभी नाइट्रोजन ऑक्साइड के स्रोत है | मृत पादपों तथा जंतुओं में उपस्थित कार्बनिक नाइट्रोजन का अमोनिया में अपघटन अमोनीकरण कहलाता है | इसमें से कुछ अमोनीय नाइट्रोजन वाष्पीकृत होकर पुनः वायुमंडल में मिल जाती है, किन्तु अधिकांश सूक्ष्मजीव (Microorganism) मृदा में उपस्थित होकर नाइट्रेट में बदल जाती है |

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नाइट्रोजनीकरण (Nitrification)

  • नाइट्रोजनीकरण (Nitrification) एक ऐसी क्रिया है, जिसमे अमोनिया नाइट्राइट को फिर नाइट्रेट में परिवर्तित करती है |
  • ज्यादातर नाइट्रोजनीकरण वायवीय रूप में पाए जाते है तथा नाइट्रोजनीकरण के दो अलग – अलग चरण होते है जिन्हे विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवो द्वारा संपन्न किया जाता है | इसमें पहला चरण अमोनिया का नाइट्राइट में ऑक्सीकरण है,तथा दूसरा चरण अमोनिया ऑक्सीकारक माइक्रोव्स द्वारा किया जाता है |
  • नाइट्रोजनीकरण के दूसरे चरण में नाइट्राइट (NO2-) का नाइट्रेट (NO3-) में ऑक्सीकरण होता है | यह प्रक्रिया प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) (एक एककोशिकीय जीव) से पूरी तरह से अलग कर समूह द्वारा की जाती है जो कि नाइट्राइट-ऑक्सीकरण बैक्टीरिया के रूप में जानी जाती है |

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