गिलोय की खेती कैसे करें | Tinospora Cordifolia Farming Explained in Hindi

गिलोय की खेती करने से सम्बंधित जानकारी

गिलोय एक प्रकार का समूह में रहने वाला पौधा है | इस पौधे का तना लगभग 2 सेमी मोटा होता है, इनके शाखाओं में गठीले निशान और जड़ें निकली रहती हैं | शाखाओं और तनो पर सफेद अनुलंब दाग धब्बा जैसा बना होता है| गिलोय की छाल सलेटी – भूरी व हल्की सफेद, मस्सेदार होती है, और इसे आसानी से छील सकते हैं | इसकी पत्तियों का आकार 5 – 15 सेमी अंडाकार होती है, और यह पत्ती हमें पान की पत्ती जैसा दिखता है |

यह पौधा बहुत अधिक लम्बा और लसने वाला होता है | गिलोय ज्यादातर दूसरे पौधों पर लसा हुआ होता है | इस पौधे को हम औषधि बनाने में प्रयोग करते हैं | आइये इस लेख में हम जानते हैं, कि गिलोय की खेती कैसे करतें है और गिलोय किस काम आता है इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है |

गिलोय उगाने के लिए जलवायु और मिट्टी (Climate and Soil For Growing Giloy)

इस पौधा को उष्णकटिबंधीय जलवायु में जैविक रूप से बलुई दोमट मिट्टी में लगाया जाता है | इसे लगाने के लिए हम मिट्टी को भुरभुरी बना लेते हैं और इससे हमें पौधों को लगाते समय आसानी होती है | बलुई मिट्टी में गिलोय बहुत तेजी से उगता है और इस तरह की मिट्टी और जलवायु गिलोय के लिए अच्छा माना जाता है |

गिलोय उगाने की सामग्री (Giloy Raising Materials)

गिलोय का पौधा लगाने के लिए हमें तनों की कटाई जून -जुलाई के दौरान कर लेनी चाहिए जो पौधारोपण की सर्वश्रेष्ठ सामग्री है | दो गांठों सहित लगभग 6 -8  इंच की कटिंग करके सीधे रोपाई की जाती है |

खेत तैयार करना और उर्वरक का प्रयोग (Field Preparation and Use of Fertilizer)

खेतों में पौधा उगाने से पहले खेत की जुताई करके और खरपतवार से मुक्त करना चाहिए। खेत तैयार करते समय प्रति हेक्टेयर 10 टन उर्वरक और नाइट्रोजन की आधी खुराक (75 Kg) प्रयोग करना होता है |

पौधरोपण करने का तरीका (Method of Planting)

गिलोय को गांठो सहित तने की कटिंग करके सीधे ही खेत में लगाया जाता है | अच्छी पैदावार के लिए इसे 3 मी.* 3 मी. की दूरी पर लगायी जाती है | गिलोय को उगाने के लिए लकड़ी की खपच्चियों की  जरूरत पड़ती है | झाड़ी या पेड़ उगाने से भी इस पौधे को सहारा मिल जाता है |

रोपाई के लिए पौध तैयार करना (Preparing Seedlings For Transplanting)

गिलोय के पौधे से काटे गए तने को 24 घंटे के अंदर रोपाई कर देनी चाहिए और करने का सही समय जून और जुलाई माना जाता है |

पौधों की दर (Plant Rate)

गिलोय का पौधारोपण के लिए एक हेक्टेयर भूमि में लगभग 2500 कलमों की आवश्यकता होती है |

संवर्धन विधि (Promotion Method)

इस विधि में 75 Kg नाइट्रोजन के साथ 10 टन उर्वरक की डोज़ सही मानी जाती है और अच्छी पैदावर के लिए लगभग दो से तीन बार निराई – गुड़ाई की आवश्यकता होती है | समय – समय पर निराई व गुड़ाई करके कतारों में से खरपतवार को निकलते रहना चाहिए |

सिंचाई विधि (Irrigation Method)

इस पौधे को वर्षों जनित स्थितियों में लगाई जाती है |  तथापि, अत्यधिक शीत और गर्म मौसम के समय इस पौधे को आकस्मिक सिंचाई लाभकारी होगी |

रोग और कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control)

गिलोय के पौधे में किसी गंभीर कीट संक्रमण और बीमारी नहीं होती है | यह पौधा खुद ही अपने आप में एक प्रकार का कीट नियंत्रण होता है |

गिलोय की कटाई (Harvesting of Giloy)

इसके तने की कटाई पतझड़ होने के समय की जाती है, तब तक  यह 2.5 सेमी.से अधिक व्यास का हो जाता है | इसको काटते समय आधार का हिस्सा दोबारा से बढ्ने के लिए छोड़ देते हैं |

कटाई के बाद का प्रबंधन (Post Harvest Management)

गिलोय के तने को सावधानीपूर्वक छोटे – छोटे टुकड़ों में काट लें और छाया में सुखाएं | इन्हे जूट के बोरें में भरकर ठंडे  और हवादार स्थान वाले गोदाम में रखें |

गिलोय की पैदावार (Yields of Giloy)

इस पौधे से लगभग दो वर्षो में प्रति हेक्टेयर लगभग 1500 Kg ताजा तने की पैदावार होती है | इसका शुष्क वजन लगभग 300 Kg होता है |

नीम पे चढ़ा गिलोय (Giloy Climbed to Neem)

नीम के पेड़ पे चढ़े हुए गिलोय को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और इसे औषधि बनाने के लिए इसका प्रयोग सबसे अधिक करते हैं | इस तरह का गिलोय बहुत ही काम मात्रा में मिल पता है जिसकी वजह से इसकी कीमत अधिक होती है | लेकिन दवा के रूप में सबसे अधिक इसका प्रयोग किया जाता है |

इस लेख के माध्यम से हमने गिलोय के बारे में जानकारी दी है | यदि आप को इस जानकारी से लाभवंतित हुए हैं तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें |