पंचगव्य क्या होता है | Panchagavya for Plants, Benefits in Hindi

पंचगव्य (Panchagavya ) से सम्बंधित जानकारी

देश में किसानों द्वारा अपनी फसलों का उत्पादन बढ़ानें अर्थात अधिक लाभ प्राप्त करनें के उद्देश्य से अपनें खेतों में रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल बेतहाशा किया जा रहा है | आज कई राज्यों में हालात इतनें ख़राब हो चुके है, कि खेतो में बिना रासायनिक खाद (Chemical Fertilizer) डाले गेंहू, बाजरा जैसी फसलों का उत्पादन करना संभव नहीं है |

दरअसल किसान पैसे कमाने की होड़ में फसलों में आवश्यकता से अधिक यूरिया, डीएपी जैसी रासायनिक खादों का इस्तेमाल कर भूमि की उर्वरकता शक्ति को बहुत ही कम कर दिया है | इसका परिणाम यह है, कि मिट्टी अम्लीय होती जा रही है और उत्पादन निरंतर घटता जा रहा है | जबकि प्राचीन काल में फसलों के उत्पादन में जैविक खाद का ही इस्तेमाल किया जाता था, जो मुख्यतः गाय के गोबर और गोमूत्र पर आधारित थे, जो आज भी तरल जैविक उर्वरकों आज परम्परागत रूप से उपलब्ध हैं | पंचगव्य क्या होता है, Panchagavya for Plants, Benefits in Hindi इसके बारे में आपको बताया जा रहा है |

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पंचगव्य क्या होता है (What Is Panchagavya)

हरित क्रांति के समय देश में कृषि के क्षेत्र में प्रगति काफी तेजी से हुई | हालाँकि इस दौरान कृषि कार्यों में रासायनिक खादों के इस्तेमाल से खाद्यान्नों के उत्पादन में भारी मात्रा में वृद्धि हुई | यहाँ तक कि रासायनिक खादों के इस्तेमाल से फसलों को आवश्यकता के अनुसार उपयोगी तत्वों को पूर्ति होनें लगी परन्तु भूमि की उर्वरा शक्ति (Fertility Power) नष्ट होनें लगी, जो हमारे भविष्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है | आज से कई दशक पूर्व फसलों के उत्पादन में किसानों द्वारा सिर्फ जैविक खाद का ही इस्तेमाल किया जाता था | जिससे उत्पादन के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति में इजाफा भी होता था |          

प्राचीन काल में सभी किसान अपनें खेतों और फसलों से बेहतर उत्पादन प्राप्त करनें के लिए जैविक खाद का उपयोग करते थे | वह फसलों की गुणवत्ता और पौधों को कीट, पतंगों आदि से बचानें के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों का इस्तेमाल करते थे, इन्ही में एक पंचगव्य है | प्राचीन समय में पंचगव्य का उपयोग खेत की उर्वरकता शक्ति बढ़ाने तथा पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता था। पंचगव्य एक बहुत ही प्रभावकारी जैविक खाद है, जो पौधों की वृद्धि एवं विकास में सहायता करनें के साथ ही प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ानें का कार्य करता है | पंचगव्य का निर्माण देसी गाय के पांच उत्पादों गौमूत्र, गोबर, दूध, दही, और घी के मिश्रण से होता है | दरअसल गाय को ‘माता’ का नाम ऐसे ही नही दे दिया गया है, गाय से उत्पन्न होनें वाली प्रत्येक चीज एक औषधि है | सबसे खास बात यह है, कि गाय के उत्पादों में पौधों के लिए जरुरत के हिसाब से सभी चीजे और पोषक तत्व उपलब्ध होते है | पंचगव्य प्रकृति द्वारा प्रदान की गयी चीजो से बनायीं गयी एक ऐसी औषधि है, जो खेत में उग्नें वाले पौधौ के आलावा भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ानें का कार्य करती है |

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पंचगव्य से फायदे (Benefits of Panchagavya)

  • कृषि योग्य भूमि में पंचगव्य का उपयोग करनें से होनें वाले लाभ इस प्रकार है-
  • भूमि में पंचगव्य का इस्तेमाल करनें से खेत में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि होती है |
  • खेत में पंचगव्य का इस्तेमाल करनें से खेत की उर्वरा अर्थात उपजाऊ शक्ति में सुधार होता है |
  • इसके निरंतर उपयोग से भूमि में हवा व नमी का संतुलन बना रहता है |
  • फसलों में विभिन्न प्रकार के होनें वाले रोग और कीट का प्रभाव काफी कम हो जाता है |
  • रासायनिक खादों की अपेक्षा यह काफी सरल और आसानी से प्राप्त किया जा सकता है |
  • पंचगव्य खेत में जल की आवश्यकता को 25 से 30 प्रतिशत तक कम कर देता है, जिसके कारण सूखे की स्थिति में पौधा जीवित अवस्था में बना रहता है | 
  • पंचगव्य के इस्तेमाल से फसलों के उत्पादन में वृद्धि के साथ ही यह पशुओं और मानव जीवन के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

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पंचगव्य बनानें हेतु आवश्यक सामग्री (Ingredients needed to make Panchagavya)

फसलों के बेहतर उत्पादन और मानव जीवन के लिए पंचगव्य अमृत के समान है और सबसे कहस बता यह है, कि आप इसे अपनें घर पर ही तैयार कर सकते है | यदि आप इसे बनाना चाहते है, तो इसके लिए कुछ सामग्री की आवश्यकता होगी जो इस प्रकार है- 

क्रं०स०  सामग्री का नाम मात्रा 
1.देशी गाय का फ्रेश गोबर5 किलोग्राम
2.देशी गाय का ताजा मूत्र3 लीटर
3.देशी गाय का ताजा कच्चा दूध2 लीटर
4.देशी गाय का दही2 लीटर
5.देशी गाय का घी500 ग्राम
6.गुड़500 ग्राम
7.पके हुए केले1 दर्जन (12)

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पंचगव्य बनाने की विधि (How to make Panchagavya)

पंचगव्य बनानें के लिए सबसे पहले 5 किलोग्राम गोबर और डेढ़ लीटर (1.5L) गोमूत्र में दो सौ पचास ग्राम (250gram) देशी घी को मिलाकर प्लास्टिक या कांक्रीट बनें हुए किसी मटके  में डाल दें। इस मिश्रण को अगले 3 दिनों तक बीच-बीच में हाथ से हिलाते रहे, और चौथे दिन मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाकर मटके को किसी ढक्कन बंद कर 15 दिनों के लिए किसी छायादार स्थान पर रख दे | अब आपको 15 दिनों तक किसी लकड़ी से रोजाना सुबह और शाम के समय इस मिश्रण को घोलना होता है |  इस प्रकार लगभग 18 दिनों के बाद पंचगव्य उपयोग के लिए बनकर तैयार हो जायेगा |

इसके पश्चात यह खमीर का रूप ले लेगा और इस मिश्रण से खुशबू आने लगे तो आप समझ जाएँ कि पंचगव्य उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया है | इसके आलावा यदि मिश्रण से खटास भरी बदबू आने लगे, तो ऐसी स्थित में आपको मिश्रण को हिलाने की प्रक्रिया एक सप्ताह अर्थात 7 दिनों के लिए और बढ़ा दें | इस प्रकार आपका पंचगव्य तैयार हो जाता है, अब आप इसे लगभग दस लीटर जल में 250 ग्राम पंचगव्य मिलाकर किसी भी फसल के लिए उपयोग कर सकते है| सबसे ख़ास बात यह है, कि इसे एक बार बनानें के बाद लगभग 6 माह तक इस्तेमाल कर सकते है | यदि हम इसे बनानें में लगत की बात करे, तो इसे बनानें में लगत लगभग 70 रु. प्रति लीटर आती है। 

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पंचगव्य का उपयोग कैसे करे (How to use Panchagavya)

पंचगव्य का प्रयोग आप विभिन्न प्रकार की फसलों जैसे गेहूँ (Wheat), मक्का (Maize), बाजरा (Bajra), धान (Paddy), मूंग (Moong), उर्द (Urd), कपास (Cotton), सरसों (Mustard), मिर्च (Chilli), टमाटर (Tomato), बैंगन (Brinjal), प्याज (Onion), मूली (Radish), गाजर (Carrot), आलू (Potato), हल्दी (Turmeric), अदरक (Ginger), लहसुन (Garlic), हरी सब्जियाँ (Green vegetables), फूल पौधे (Flower plants) आदि में प्रत्येक 15 दिनों के अंतराल में कर सकते है | यहाँ तक कि आप इसे दस लीटर जल में 250 ग्राम पंचगव्य मिलाकर किसी भी फसल में इस्तेमाल कर सकते है | यदि फसल के काटनें का समय नजदीक है, तो आप इसे फसल कटाई से 20 दिन पहले इसका उपयोग कर सकते है | 

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