केसर की खेती कैसे होती है | Saffron Farming in Hindi | केसर का मूल्य

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केसर की खेती (Saffron Farming) से सम्बंधित जानकारी

केसर (Saffron) को अनोखी खुशबु और खास तरह के गुणों के लिए पहचाना जाता है | केसर मानव स्वास्थ के लिए बहुत ही लाभदायक होता है, केसर का मूल्य अधिक होने के चलते इसे लाल सोना (Red Gold) भी कहा जाता है | औषधीय और गुणकारी पौधा होने के कारण इसका उपयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक चिकित्सीय के रूप में होता रहा है | इसी तरह केसर को साबुन तथा सौन्दर्य प्रसाधन की चीज़ो के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है |

केसर का उपयोग खाने की कई तरह की चीजों में किया जाता है, इसके अंदर कई तरह के अत्यंत गुणकारी तत्व मौजूद है, जो मनुष्य के स्वास्थ के लिए काफी लाभदायक होते है | वह महिलाये जो गर्भवती होती है, डॉक्टर उन्हें दूध में केसर डालकर पीने को कहते है | केसर का इस्तेमाल करने से हृदय सम्बंधित रोग नहीं होते है तथा रक्त सोधन की क्षमता भी बढ़ती है | यदि आप भी केसर की खेती करना चाहते है तो यहाँ आपको केसर की खेती से जुड़ी जानकारी केसर की खेती कैसे होती है, Saffron Farming in Hindi, केसर का मूल्य के बारे में बताया जा रहा है

केसर की खेती कैसे होती है (How to Cultivate Saffron)

केसर की खेती को मुख्य रूप से यूरोप और एशियाई भागों में किया जाता है, ईरान और स्पेन जैसे देश पूरी दुनिया का 80% तक का केसर उत्पादित करते है | यह केसर समुद्र तल से 1000 से 2500 मीटर की ऊंचाई पर उगाया जाता है | केसर की खेती के लिए बर्फीले प्रदेशो को उचित माना जाता है | केसर की खेती कर किसान अच्छी कमाई भी कर सकते है |

केसर की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी (Suitable Soil For Saffron Cultivation)

केसर की खेती में रेतीली चिकनी बलुई और दोमट मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है, किन्तु वर्तमान समय में उचित देखरेख कर इसकी खेती को राजस्थान जैसे शुष्क राज्यों में भी किया जा रहा है | केसर की खेती के लिए जल भराव वाली जगह नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जलभराव की स्थिति में इसके बीज सड़कर नष्ट हो जाते है | इसकी खेती के लिए भूमि का P.H. मान सामान्य होना चाहिए |

केसर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान (Suitable Climate and Temperature for Saffron Cultivation)

केसर की खेती बर्फीले क्षेत्रों में अधिक होती है, केसर का उत्पादन सर्दी, गर्मी और बारिश तीनों ही जलवायु में होता है, सर्दियों में पड़ने वाली बर्फ और गीला मौसम इसके फूलो में होने वाली वृद्धि को रोक देता है | जिससे बाद में नए फूल अधिक मात्रा में निकलते है, जो इसके लिए काफी अच्छा होता हैं | जब सूर्य की गर्मी से बर्फ पिघलने और जमीन सूखने लगती है, तब इसके पौधों में फूल आना आरम्भ होने लगते है, इन्ही फूलो में केसर लगता है | लगभग 20 डिग्री के तापमान पर इसके पौधे अच्छे से वृद्धि करते है, तथा 10 से 20 डिग्री के तापमान पर इसके पौधे फूल बनने लगते है |

केसर की उन्नत किस्मे (Improved Varieties of Saffron)

वर्तमान समय में केसर की केवल दो ही किस्मे मौजूद है, यह केसर कश्मीरी और अमेरिकन नाम से जानी जाती है, भारत में अमेरिकन केसर को अधिक मात्रा में उगाया जाता है | केसर की किस्मों की जानकारी इस प्रकार है:-

कश्मीरी मोंगरा किस्म का केसर (Kashmiri Mongra Variety Saffron)

केसर की यह किस्म सबसे महंगी मानी जाती है, दुनियाभर में इस केसर की कीमत 3 लाख रूपए प्रति किलो से भी अधिक है | जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ और पंपोर में इस किस्म की केसर की खेती को किया जाता है | इसके पौधे 20 से 25 सेंटीमीटर ऊचाई तक बढ़ते है |

इन पौधों पर बेंगनी, नीले और सफ़ेद रंग के फूल निकलते है, यह फूल आकार में कीप नुमा होते है | इन फूलो के अंदर दो से तीन लाल-नारंगी रंग के तन्तु (पंखुडियां) होती है, फूलो के अंदर उपस्थित यह तन्तु ही केसर होता है | लगभग 75 हज़ार फूलों से 450 ग्राम ही केसर प्राप्त होता है |

पौधों के लिए देखभाल (Care for Plants)

अमेरिकन किस्म का केसर (American Saffron)

केसर की इस किस्म को जम्मू-कश्मीर के अलावा कई जगहों पर किया जा रहा है | इस किस्म का केसर कश्मीरी मोंगरा केसर की तुलना में कम कीमत का होता है | इसके पौधों को किसी खास तरह की जलवायु की आवश्यकता नहीं होती है | केसर की यह किस्म राजस्थान जैसी शुष्क क्षेत्रों में उगाई जा रही है |

इसके पौधे चार से पांच फिट तक की उचाई तक बढ़ते है, तथा पौधों के शिखर पर इसके डंठल बनते है | जिनपर पीले रंग के फूल निकलते है, इन फूलो में ही तन्तु होते है, जिनकी मात्रा बहुत अधिक होती है | इनके लाल हो जाने पर इन्हे तोड़ लिया जाता है |

केसर की खेत जुताई का तरीका (Plowing the Field)

इसके लिए खेत की गहरी तरह से जुताई करनी होती है, तथा खेत को अच्छी तरह से जोतकर उचित मात्रा में उवर्रक मिलाकर खेत को अच्छी तरह से तैयार करना होता है, क्योंकि इसके पौधे एक बार लग जाने पर कई बार फसल देते है |

खेत की पहली जुताई को पलाऊ लगा कर करना चाहिए, फिर गोबर की खाद को डालकर उसे कल्टीवेटर की सहायता से तिरछी जुताई कर खाद को मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए | इसके बाद खेत में पानी लगा देना चाहिए और जमीन के हल्का सूख जाने के बाद उसमे N.P.K. की पर्याप्त मात्रा को मिलाकर रोटावेटर चलवा दे | जिससे खेत बिलकुल समतल और मिट्टी भुरभुरी हो जाएगी और  खेत में जलभराव की समस्या भी नहीं होगी |

केसर का बीज लगाने का सही समय और तरीका (Right Time and Method of Planting Seeds)

केसर की फसल लगभग 6 महीने में तैयार हो पाती है | केसर की अच्छी गुणवत्ता को प्राप्त करने के लिए केसर के बीजो को सही समय पर लगाना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि अच्छी गुणवत्ता के आधार पर ही केसर की बिक्री होती है |

केसर के बीजों को बारिश का मौसम ख़त्म होने के बाद जुलाई से लेकर सितम्बर माह तक लगा देना चाहिए | अगस्त महीने के शुरुआत में इन बीजों को लगाना सबसे अच्छा माना जाता है | अगस्त के मौसम में बीजों को लगा देने के बाद सर्दियों के शुरुआती मौसम में इसके पौधे केसर देने के लिए तैयार हो जाते है, जिससे ज्यादा सर्दी में केसर के ख़राब होने का खतरा नहीं होता है |

केसर के बीजो को खेत में समतल तथा मेड दोनों ही तरीके से लगा सकते है, समतल तरीके से लगाने पर दो पौधो के बीच में डेढ़ से दो फीट की दूरी होना जरूरी है, और मेड़ पर लगाने पर प्रत्येक मेड़ के मध्य लगभग एक से डेढ़ फीट की दूरी होनी चाहिए और मेड़ पर लगाए गए पौधों में एक फ़ीट की दूरी होनी चाहिए |

कश्मीरी मोगरा केसर के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 1 से 2 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है, यह बीज लहसुन की तरह होता है, और अमेरिकी केसर उगाने के लिए आधा किलो बीज ही काफी होते है |

पौधो की सिंचाई का तरीका (Plant Irrigation Method)

केसर के बीजो को खेत में लगाने के पश्चात इसकी सिंचाई कर देनी चाहिए | यदि केसर को शुष्क प्रदेशो में उगाया जा रहा है, तो सर्दियों के मौसम में 15 दिन में सिंचाई करते रहना चाहिए | गर्मियों के मौसम में प्रत्येक सप्ताह में दो बार सिंचाई करनी चाहिए और बारिश के मौसम में आवश्यकता पड़ने पर ही इसकी सिंचाई करे |

उर्वरक की सही मात्रा (Right Amount of Fertilizer)

उवर्रक की सही मात्रा के लिए खेत को तैयार करते वक्त जुताई के समय 10 से 15 गाडी पुरानी गोबर की खाद को प्रति एकड़ के हिसाब से डालना चाहिए | इसके अतिरिक्त वह किसान जो रासायनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहते है | वह  N.P.K. की सही मात्रा को खेत में आखरी जुताई से पहले छिड़क दे, साथ ही वेस्ट डिकम्पोज को सिचाई के साथ पौधो को देना चाहिए |

खरपतवार पर नियंत्रण कैसे करे (How to Control Weeds)

केसर के पौधो को खरपतवार से बचाने के लिए इसकी शुरुआती देखरेख जरूरी होती है | जब खेत में बीच अंकुरित होने लगे तब उसके कुछ दिन बाद पौधों की निराई – गुड़ाई कर देनी चाहिए | इसके बाद 20 दिन के अंतराल में दो से तीन और गुड़ाई कर देनी चाहिए, इससे पौधे अच्छे से विकास करते है |

उन प्रदेशो में जहा बर्फ नहीं पड़ती है, वहां पौधों की देखभाल की आवश्यकता पड़ती है | सर्दियों का मौसम इसके पौधों के लिए बिलकुल अनुकूल होता है, किन्तु गर्मियों के मौसम में अधिक गर्मी से इनके पौधों के नष्ट होने का खतरा होता है | गर्मी से बचाने के लिए इनके पौधों को छाया की जरूरत होती है|

केसर के पौधों में लगने वाले रोग (Diseases of Saffron Plants)

केसर के पौधों में बहुत ही कम रोग लगते है, इसके पौधों में सिर्फ दो तरह के रोग देखने को मिलते है | जिनकी जानकारी इस प्रकार है:-

बीज सडन रोग (Seed rot Disease)

यह रोग पौधों की रोपाई के बाद ज्यादा देखने को मिलता है, इस रोग को सड़ांध नाम से भी जाना जाता है | यह रोग बीज को पूरी तरह से सड़ा देता है, जिससे पौधा अंकुरित होने से पहले ही पूरी तरह से नष्ट हो जाता है | सस्पेंशन कार्बेन्डाजिम दवा से उपचारित कर इस रोग की रोकथाम की जा सकती है | इसके बावजूद अगर यह रोग पौधों पर दिखाई दे तो पौधे की जड़ों पर 0.2 प्रतिशत सस्पेंशन कार्बेन्डाजिम का छिड़काव कर उपचारित करना चाहिए |

मकड़ी जाल रोग (Spider web Disease)

यह रोग पौधों की वृद्धि को पूरी तरह से रोक देता है. यह रोग पौधों के अंकुरित होने के कुछ समय बाद दिखाई देता है. इस तरह का रोग पैदावार को प्रभावित करता है, तथा इससे बचाव के लिए 8 से 10 दिन पुरानी छाछ की पर्याप्त मात्रा को पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़काव करना चाहिए |

केसर की तुड़ाई और सुखाई कैसे करे (How to Harvest and Dry Saffron)

केसर के पौधे खेत में रोपाई करने के तीन से चार माह पश्चात केसर देने लायक हो जाते है | पौधों में लगे फूलों पर जब पंखुडिया लाल व भगवा रंग की दिखाई देने लगे तब उन्हें तोड़ कर जमा कर लें | इसके बाद तोड़ी गयी इन पंखुड़ियों को किसी छायादार स्थान पर सूखा लें | केसर के पूरी तरह से सूख जाने पर उसे किसी बर्तन में रख लें |

केसर की पैदावार और मूल्य (Saffron Yield and Benefits)

कश्मीरी मोंगरा केसर तक़रीबन 1,50,000 फूलों से एक किलो केसर प्राप्त होती है, वही अमेरिकन केसर की बात करे तो वह इसकी पैदावार से अधिक पैदावार करती है | अमेरिकी केसर एक बीघा खेत में एक किलो तक केसर प्राप्त होता है, किन्तु दोनों के बाजार भाव में काफी अंतर देखने को मिलता है |

कश्मीरी मोंगरा केसर की कीमत तीन लाख के आसपास होती है, वहीं अमेरिकन केसर की बात करे तो केसर की गुणवत्ता के अनुसार 50 हजार से 2 लाख तक के मूल्य में बेचा जाता है | इस तरह से अगर किसान भाई चाहे तो अमेरिकन केसर की खेती कर प्रति बीघा में 50 हज़ार से दो लाख तक की कमाई कर सकते है |