खजूर की खेती कैसे होती है | Palm Date Farming in Hindi | खजूर की कीमत


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खजूर की खेती (Palm Date Farming) से सम्बंधित जानकारी

खजूर एक बहुत ही लाभकारी फल होता है, जिसका पौधा 15 से 25 मीटर ऊँचा होता है | खजूर के पौधों की उत्पत्ति के बारे में किसी को भी विशेष जानकारी नहीं है, किन्तु अरब और अफ़्रीकी देशो को खजूर के पौधों का मुख्य उत्पादक कहा जाता है, और यही से ही पूरे विश्व में खजूर का निर्यात होता है | यह पृथ्वी का सबसे प्राचीन वृक्ष भी माना जाता है | खजूर में कई तरह के गुण पाए जाते है, जिसका सेवन करने से मनुष्य में ब्लड प्रेशर, दिल, मनुष्य में कैंसर, पेट और हड्डियों से सम्बंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है | खजूर को खाने के अलावा इसके फलो से अनेक प्रकार की चीजें जैसे जूस, जैम, चटनी, अचार और बेकरी उत्पादन की कई चीजें शामिल है |

इसके सूखे हुए फलों से पिंडखजूर तथा फलों को सूखाकर छुहारो को बनाया जाता है | विश्व में ईरान को सबसे अधिक खजूर का उत्पादन वाला देश कहा जाता है, किन्तु वर्तमान समय में कुछ उच्च तकनीकों का इस्तेमाल कर इसकी खेती भारत के कुछ राज्यों में जलवायु के हिसाब से की जा रही है | यदि आप भी खजूर की खेती करने का मन बना रहे है, तो इस लेख में हम आपको खजूर की खेती कैसे होती है (Palm Date Farming in Hindi) के बारे में तथा खजूर की कीमत से सम्बंधित विशेष जानकारी देने जा रहे है |

खजूर की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी जलवायु और तापमान (Palm Date Cultivation Suitable Soil, Climate and Temperature)

खजूर के उत्पादन के लिए उचित जल निकासी वाली रेतीली मिट्टी की आवश्यकता होती है | कठोर भूमि में इसकी खेती को नहीं किया जा सकता है | इसकी खेती में 7 से 8 के मध्य P.H. मान वाली भूमि की आवश्यकता होती है, खजूर एक शुष्क जलवायु का पौधा है | इसलिए इसके पौधों को अधिक वर्षा की जरूरत नहीं होती है | मरुस्थलीय क्षेत्रों में इसकी खेती को आसानी से किया जा सकता है | इसके पौधे तेज धूप में अच्छे से विकास करते है | ठन्डे प्रदेशो में इसकी खेती को नहीं किया जा सकता है | इसके पौधों को अच्छे से वृद्धि करने के लिए 30 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, तथा फलों के पकने के दौरान इसे 45 डिग्री का तापमान चाहिए होता है |

खजूर की उन्नत किस्में (Palm Dates Improved Varieties)

वर्तमान समय में खजूर की कई उन्नत किस्में बाजार में मौजूद है, जिन्हे जलवायु और पैदावार के हिसाब से उगाया जा रहा है | इन उन्नत किस्मो को नर और मादा दो प्रजातियो में बांटा गया है, जिनकी जानकारी इस प्रकार है –

मादा प्रजाति की किस्में (Female Species)

इस मादा प्रजाति की उन्नत क़िस्म को फल देने के लिए उगाया जाता है |

बरही

खजूर की इस क़िस्म को अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उगाया जाता है | इसके पौधों अधिक तेजी से वृद्धि करते है | इसके पौधों में फल देरी से निकलते है, तथा निकलने वाले फलों का आकार अंडाकार और रंग पीला होता है | इसके एक पौधे से तक़रीबन 70 से 100 KG फलों को प्राप्त किया जा सकता है |

खुनेजी

खुनेजी क़िस्म के पौधे सामान्य रूप से वृद्धि करते है | इसका पौधा कम समय में पैदावार देना आरम्भ कर देता है | इसमें लगने वाले फलों का रंग लाल होता है, जो स्वाद में काफी मीठे होते है | इसके एक पौधे से तक़रीबन 60 KG खजूर प्राप्त हो जाते है |

हिल्लावी

हिल्लावी खजूर की एक अगेती क़िस्म होती है, जो जुलाई के महीने में उत्पादन देने के लिए तैयार हो जाती है | इस क़िस्म के फलों का रंग हल्का नारंगी पाया जाता है, जिसमे छिलका पीले रंग का होता है | इसका एक पौधा 100 KG तक की पैदावार देता है |

इसके अलावा भी खजूर की कई उन्नत किस्में जैसे – जामली, खदरावी, मेडजूल आदि को अधिक पैदावार देने के लिए तैयार किया गया है |

नर प्रजाति की किस्में (Male Species)

इस नर प्रजाति की किस्मो में फलों का उत्पादन नहीं होता है, इसके पौधों पर केवल फूल खिलते है |

धनामी मेल

धनामी मेल के पौधों पर तकरीबन 10 से 15 फूल खिलते है | इसके प्रत्येक फूल से परागकण की 10 से 15 ग्राम की मात्रा पाई जाती है |

मदसरीमेल

यह भी एक नर क़िस्म है, जिसमे केवल 5 फूल खिलते है | इसके प्रत्येक फूल से परागकण की 6 ग्राम की मात्रा पाई जाती है |

खजूर के खेत की तैयारी और उवर्रक की मात्रा (Date Field Preparation and Fertilizer Quantity)

खजूर की खेती के लिए रेतीली और भुरभुरी मिट्टी की आवश्यकता होती है | इसलिए खजूर की फसल लगाने से पहले इसके खेत को अच्छी तरह से तैयार कर लेना चाहिए | इसके लिए सबसे पहले खेत की मिट्टी पलटने वाले हलो से गहरी जुताई कर देनी चाहिए | इसके बाद खेत को कुछ समय के लिए ऐसे ही खुला छोड़ दे | इसके बाद खेत में कल्टीवेटर के माध्यम से दो से तीन जुताई कर दे | इससे खेत की मिट्टी पूरी तरह से भुरभुरी हो जाएगी | खेत की मिट्टी के भुरभुरा हो जाने के बाद उसमे पाटा लगाकर चलवा दे, जिससे खेत की मिट्टी समतल हो जाएगी और खेत में जल-भराव की समस्या नहीं होगी |

इसके बाद खेत में एक मीटर की दूरी रखते हुए व्यास वाले गड्डो को तैयार कर लिया जाता है | इन गड्डो में 25 से 30 KG गोबर की पुरानी खाद को डालकर मिट्टी में अच्छे से मिला दिया जाता है | इसके अतिरिक्त खाद के रूप में फोरेट या कैप्टान की उचित मात्रा को भी गड्डो में देना चाहिए | उवर्रक और खाद की मात्रा देने के बाद गड्डो की सिंचाई कर दी जाती है, इसके गड्डो को पौध रोपाई के एक महीने पूर्व तैयार कर लिया जाता है | रासायनिक खाद के रूप में प्रति एकड़ के हिसाब से यूरिया की चार KG की मात्रा को वर्ष में दो बार देना होता है |

खजूर के पौधों की रोपाई का सही समय और तरीका (Date Palm Plants Transplanting Right time and Method)

खजूर के बीजो की रोपाई को पौधों के रूप में करना ज्यादा अच्छा होता है, इससे उन्हें तैयार होने में अधिक समय नहीं लगता है | इसलिए इसके पौधों को किसी सरकारी रजिस्टर्ड नर्सरी से खरीद लेना चाहिए | इसके पौधों को खरीदते समय यह जरूर ध्यान रखे की पौधे बिलकुल स्वस्थ हो | सरकारी नर्सरी से ख़रीदे गए पौधों पर सरकार 70% तक का अनुदान भी देती है | खजूर के पौधों को तैयार किये गए गड्डो में लगाया जाता है | इन गड्डो के बीच में 6 से 8 मीटर की दूरी होती है | इन गड्डो के बीच में एक छोटा सा गड्डा तैयार कर पौधों की रोपाई की जाती है | इसके पौधों की रोपाई के लिए अगस्त के महीने को उचित माना जाता है | एक एकड़ के खेत में तक़रीबन 70 खजूर के पौधों को लगा सकते है |

खजूर के पौधों की सिंचाई (Palm Plant Irrigation)

खजूर के पौधों को बहुत ही कम सिंचाई की आवश्यकता होती है | गर्मियों के मौसम में इन्हे 15 से 20 दिन की पानी देना चाहिए, वही सर्दियों के मौसम में इसके पौधों को महीने में केवल एक बार ही सिंचाई की आवश्यकता होती है |

खजूर के पौधों में खरपतवार नियंत्रण (Date Palm Plants Weed Control)

खजूर के पौधे 6 मीटर की दूरी पर लगाए जाते है, इसलिए इसके खेत में 5 से 6 गुड़ाई की आवश्यकता होती है | इसके खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई – गुड़ाई तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए | खरपतवार नियंत्रण से पौधे अच्छे से विकास करते है, और फलों का उत्पादन भी अच्छे से होता है |

खजूर के पौधों में लगने वाले रोग एवं उनकी रोकथाम (Date Plant Diseases and their Prevention)

दीमक

यह दीमक रोग खजूर के पौधों की जड़ो पर आक्रमण कर उसके पौधों को पूरी तरह से नष्ट कर देता है | इस रोग की रोकथाम के लिए क्लोरपाइरीफास की उचित मात्रा पानी में मिलाकर पौधों की जड़ो पर डाली जाती है |

पक्षियों का आक्रमण

खजूर के पौधों पर जब फल लगने लगते है तब पक्षियों के आक्रमण का खतरा होता है | पक्षी पौधों पर लगे फलों को काटकर अधिक नुकसान पंहुचते है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है | पक्षियों के आक्रमण से पौधों को बचाने के लिए पौधों पर जाल को बिछा दिया जाता है |

खजूर के फलों की पैदावार और लाभ (Date Fruit Yield and Benefits)

खजूर का पौधा रोपाई के 3 वर्ष बाद पैदावार देने के लिए तैयार हो जाता है | जब इसके फल पक जाते है, तब इसके फलों की तुड़ाई तीन चरणों में कर लेनी चाहिए | पहले चरण की तुड़ाई में इसके ताजे और पके हुए फलों की तुड़ाई की जाती है, दूसरे चरण में इसके नर्म फलों की तुड़ाई की जाती है, तथा अंतिम चरण में फलों के सूख जाने पर तुड़ाई की जाती है, जिसका इस्तेमाल छुहारों को बनाने में किया जाता है |

खजूर की खेती में कम खर्च की आवश्यकता होती है | इसका एक पौधा पांच वर्ष बाद पूर्ण रूप से तैयार होने पर 70 से 100 KG की पैदावार देता है | एक एकड़ के खेत में तक़रीबन 70 पौधे लगाए जाते है, जिससे इसकी एक बार की फसल से 5,000 KG की पैदावार प्राप्त की जा सकती है | खजूर का बाज़ारी भाव काफी अच्छा होता है, जिससे किसान भाई 5 वर्षो में दो से तीन लाख की कमाई आसानी से कर सकते है |