आम की खेती कैसे करते हैं | आम की खेती से कमाई | Mango Farming in Hindi


आम की खेती (Mango Farming) से सम्बंधित जानकारी

आम की खेती रसेदार फल के रूप में की जाती है, पूरे विश्व में भारत को सबसे अधिक आम का उत्पादन करने वाला देश कहा जाता है | आम अपने अनोखे स्वाद, खुशबु और रंग की वजह से फलो का राजा कहलाता है | इसमें विटामिन ए की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है | आम को सीधे तौर पर खाने के अलावा इससे जूस, जैम, जैली और अचार को बनाने के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है | आम की खेती उष्ण और समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में समुद्रतल से 600 मीटर की ऊंचाई पर की जाती है |

बाजार में आम की बहुत अधिक मांग होती है, और इसके अच्छे दाम भी मिल जाते है, जिससे किसान भाई आम का फसल करना बहुत पसंद करते है | इस पोस्ट में आपको आम की खेती कैसे करते हैं (Mango Farming in Hindi) तथा आम की खेती से कमाई इसके बारे में जानकारी दी जा रही है |

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आम की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी,जलवायु और तापमान (Mango Cultivation Suitable Soil, Climate and Temperature)

आम की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है | इसके अलावा भूमि भी उचित जल-निकासी वाली होनी चाहिए | सामान्य P.H. मान वाली भूमि में इसकी खेती को आसानी से किया जा सकता है | उष्ण और समशीतोष्ण जलवायु आम की फसल के लिए उपयुक्त मानी जाती है | भारत में इसे गर्मियों के मौसम में उगाया जाता है |

आम के पौधों पर फूल आने और फलो के बनने के लिए शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है | अधिक वर्षा इसके फलो के लिए उपयुक्त नहीं होती है | इसके पौधों को आरम्भ में विकास करने के लिए 20 डिग्री तापमान की जरूरत होती है, तथा पौधों पर फूल लगने के दौरान 27 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है |

आम की उन्नत किस्में (Mango Improved Varieties)

वर्तमान समय में आम की कई उन्नत किस्में मौजूद है, जिन्हे स्वाद, रस और अधिक पैदावार के हिसाब से उगाया जाता है | यह किस्म दो भागो में विभाजित है | जिसकी जानकारी इस प्रकार है –

आम की देशी प्रजाति (Mango Native Species)

बंबइया किस्म के आम

इस किस्म के फलो को तैयार होने में कम समय लगता है | इसके फल पकने के बाद भी हरे रंग के दिखाई देते है | आम की इस किस्म में अधिक मात्रा में गुदा और मिठास भी अधिक पाई जाती है | आम की यह किस्म मई के महीने में पककर तैयार हो जाती है |

तोतापरी किस्म के आम

आम की इस किस्म को उसके आकार के हिसाब से पहचाना जाता है | तोतापरी आम आकार में तोते की चोंच की तरह होता है | इस किस्म के फलो में कम मिठास पाई जाती है, जिस वजह से इसे जूस, अचार और पेय पदार्थो को बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है |

लंगड़ा आम

लंगड़ा आम का सबसे अधिक उत्पादन बनारस में किया जाता है | बनारस को लंगड़ा आम का जन्मस्थल भी कहा जाता है | इस किस्म के आम का स्वाद बहुत अनोखा होता है, जिस वजह से लंगड़ा आम को बहुत अधिक पसंद किया जाता है | इसके फल आकार में अंडाकार होते है, तथा रंग में हरे और पीले होते है |

दशहरी

दशहरी किस्म का आम उत्तर प्रदेश राज्य में अधिक मात्रा में उगाया जाता है | इस किस्म के पौधों को अधिक उत्पादन देने लिए उगाया जाता है | इसमें निकलने वाले फलो का स्वाद अधिक मीठा होता है, तथा इसके फल पीले रंग के होते है | दशहरी आम जून के महीने में पककर तैयार हो जाता है |

इसके अलावा भी आम की कई देशी किस्मो को उगाया जाता है, जो इस प्रकार है- अल्फांसो, केसर, फजरी, नीलम, वनराज, मलगोवा, बैंगन पल्ली |

संकर प्रजाति के आम (Hybrid Mango)

आम की यह प्रजाति देशी किस्मो के साथ संकरण के माध्यम से तैयार की जाती है | जिसकी जानकारी कुछ इस प्रकार है-

आम्रपाली

संकर प्रजाति की इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली दशहरी और नीलम किस्म के साथ संकरण कर तैयार की गई है | इस किस्म में निकलने वाले फलो का आकार सामान्य होता है| इसके फल स्वाद में अधिक स्वादिष्ट होते है | यह किस्म प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 200 से 250 क्विंटल की पैदावार देने के लिए जानी जाती है |

मल्लिका

मल्लिका किस्म को दशहरी और नीलम किस्म का संकरण कर तैयार किया गया है | इसमें निकलने वाले फलो का आकार बड़ा तथा रंग पीला गुलाबी होता है | इसके फलो में अधिक मात्रा में गुदा पाया जाता है, तथा इन फलो को अधिक समय तक भंडारित किया जा सकता है | आम की इस किस्म को व्यापारिक रूप से उगाया जाता है |

पूसा लालिमा

पूसा लालिमा किस्म के फलो को व्यापारिक तौर पर उगाया जाता है | इसमें निकलने वाले फलो का आकार सामान्य और लम्बा तथा फल का रंग लाल होता है | इसके फलो में निकलने वाला गुदा नारंगी रंग का होता है, तथा यह फल अधिक समय तक भंडारित किये जा सकते है |

इसके अलावा भी आम की कई प्रजातियां है, जिन्हे देशी किस्मो के साथ संकरण कर अधिक पैदावार के लिए उगाया जाता है | संकर किस्में इस प्रकार है- नीलफॉन्सो, अलफजरी, हाइब्रिड-108, अरुणिका, अम्बिका आदि |

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आम के खेत की तैयारी और उवर्रक की मात्रा (Mango Field Preparation and Fertilizer Quantity)

आम का पूर्ण विकसित पौधा 20 वर्षो तक पैदावार देता है | इसलिए इसके खेत में पौधों को लगाने से पूर्व खेत को अच्छी तरह से तैयार कर लिया जाता है | सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से मिट्टी पलटने वाले हलो से जुताई कर देनी चाहिए | इसके बाद खेत को कुछ समय के लिए ऐसे ही खुला छोड़ देना चाहिए | इससे खेत की मिट्टी में सूर्य की धूप अच्छी तरह से लग जाती है | इसके बाद खेत की रोटावेटर से दो से तीन तिरछी जुताई करवा दे | इससे खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाती है | खेत की मिट्टी भुरभुरी कर देने के बाद खेत में पाटा लगाकर चलवा दे, जिससे खेत समतल हो जायेगा और जल-भराव की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा |

खेत के समतल हो जाने के बाद पौधों की रोपाई के लिए खेत में 5 मीटर की दूरी रखते हुए एक मीटर चौड़े और आधा मीटर गहरे गड्डो को तैयार कर लिया जाता है | इसके बाद इन गड्डो में उवर्रक की उचित मात्रा को मिट्टी के साथ मिलाकर गड्डो में भर देना चाहिए | गड्डो में मिट्टी भरने के बाद उनकी सिंचाई कर देनी चाहिए | इससे पौधों के लगाने के समय तक मिट्टी अपघटित होकर कठोर हो जाती है | इन गड्डो को पौधों की रोपाई से एक महीने पहले तैयार कर ले | गड्डो में उवर्रक की उचित मात्रा देने के लिए 25 KG पुरानी गोबर की खाद दी जाती है | इसके अलावा रासायनिक खाद के रूप में 150 GM, N.P.K. की मात्रा को तीन भागो में बांटकर वर्ष में तीन बार देना होता है |

इसके अतिरिक्त जब पौधा 10 से 12 वर्ष का हो जाये उस समय रासायनिक उवर्रक की मात्रा 1 KG तक बढ़ा दी जाती है | इस 1 KG की मात्रा को वर्ष में चार बार दिया जाता है | इससे आम के पौधे अच्छे से विकास करेंगे और फल भी अधिक मात्रा में प्राप्त होंगे |

आम के पौधों की रोपाई का सही समय और तरीका (Mango Plants transplanting Right time and Method)

आम के पौधों की रोपाई पौध के रूप में की जाती है | इसके पौधों को खेत में लगाने से पहले खेत में तैयार गड्डो में एक छोटा सा गड्ढा बना लिया जाता है | इन छोटे गड्डो में आम के पौधों की रोपाई कर दी जाती है | गड्डो में पौधों को लगाने से पहले उन्हें गोमूत्र या बाविस्टीन की उचित मात्रा से उपचारित कर लिया जाता है |

इसके पौधों की रोपाई के लिए मार्च का महीना उचित माना जाता है,किन्तु जिन क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था अच्छी नहीं होती है, वहा इसके पौधों की रोपाई बारिश के मौसम जून और जुलाई के महीने में की जाती है |

आम के पौधों की सिंचाई (Mango Plants Irrigation)

आम के पौधों को प्रारंभिक वर्ष में अधिक सिंचाई के आवश्यकता होती है | इसके पौधों को 12 से 15 सिंचाई की जरूरत होती है | इसकी पहली सिंचाई पौध रोपाई के तुरंत बाद कर दी जाती है | इसके पौधों को विकास करने के लिए नमी की आवश्यकता होती है, इसलिए इसके पौधों को पानी देते रहना चाहिए | गर्मियों के मौसम के इसके पौधों की सिंचाई सप्ताह में एक बार करनी चाहिए, तथा सर्दियों के मौसम में इसके पौधों को 15 से 20 दिन अंतराल में पानी देना होता है |

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आम के पौधों में खरपतवार नियंत्रण (Mango Plants Weed Control )

आम के पौधों में खरपतवार नियंत्रण के लिए रासायनिक विधि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए | इसके  पौधों में प्राकृतिक विधि द्वारा खरपतवार पर नियंत्रण किया जाता है | इसके पौधों की पहली गुड़ाई पौध रोपाई के एक महीने बाद की जाती है | आम के पौधों में प्रारंभिक वर्ष में 8 से 10 गुड़ाई की जरूरत होती है | इसकी पहली गुड़ाई के बाद बाकी की गुड़ाई को 20 से 25 दिन के अंतराल में करना होता है |

आम के पौधों में लगने वाले रोग (Mango Plant Diseases)

आम के पौधों में भी कई तरह के रोग देखने को मिल जाते है, जो इसके पौधों को नष्ट कर पैदावार को प्रभावित करते है | पौधों में लगने वाले रोग इस प्रकार है- आंतरिक विगलन, गमोसिस, तना बेधक, एन्थ्रेक्नोज, मैंगो हॉपर, पाउडरी मिल्ड्यू आदि |

आम की खेती से कमाई और तुड़ाई (Mango Fruit Harvesting, Yield and Benefits)

आम का पौधा 85 से 110 दिन में पैदावार देने के लिए तैयार हो जाता है | जब इसके फलो का रंग ऊपर से पीला दिखाई दे | तब इसकी तुड़ाई कर ली जाती है | फलो की तुड़ाई के बाद उन्हें पानी से धोकर छायादार जगह पर अच्छे से सुखा लिया जाता है | इसके पूर्ण विकसित पौधे से 100 से 150 किलो तक फल प्राप्त हो जाते है, तथा एक एकड़ के खेत में तक़रीबन 400 पौधों को लगाया जा सकता है | जिसका उत्पादन 40,000 से 60,000 के आसपास तक पाया जा सकता है | आम का बाज़ारी भाव 30 से 50 रूपए प्रति किलो होता है, जिससे किसान भाई इसके पूर्ण विकसित पौधों से 8 से 10 लाख की कमाई कर अच्छा लाभ कमा सकते है |

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