कृषि पर आधारित उद्योग के नाम | भारत में कृषि आधारित उद्योग कौन-कौन से हैं [उदाहरण सहित]


कृषि पर आधारित उद्योग से सम्बन्धित जानकारी

भारत में कृषि क्षेत्र रोजगार का सबसे बड़ा उद्योग है, जिसे वजह से भारत को कृषि प्रधान देश भी कहते है | भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का काफी योगदान भी रहता है | भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की स्थिति काफी पिछड़ी हुई है, तथा ग्रामीण आबादी भी तेजी से शहरो की और पलायन कर रही है | जिस वजह से सरकार कृषि को बढ़ावा देने के लिए लोगो को कृषि की और प्रोत्साहित कर रही है | गावो के बहुत ही कम लोग अब कृषि में ध्यान दे रहे है | अधिकतर लोग शहरो की और जा रहे है, जिस वजह से शहरो में भी बहुत समस्याए हो रही है |

देश की सरकार कृषि को बढ़ावा और प्रोत्साहन देने के लिए कृषि से संबंधित लोन की सुविधाए ला रही है | सरकार कृषि उद्योग को बढ़ावा देकर कृषि का ढांचा मजबूत करेगी, इससे ग्रामीण लोगो को रोजगार मिलेगा तथा देश के नागरिको को खाद्य सुरक्षा मिलेगी | यहाँ पर आपको कृषि पर आधारित उद्योग कौन कौन से हैं, तथा कृषि आधारित सबसे बड़ा उद्योग और कृषि उद्योग लोन कैसे प्राप्त करे के बारे में जानकारी दी जा रही है |

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कृषि उद्योग किसे कहते है (Agriculture Industry)

कृषि उद्योग कच्चा माल या उत्पाद कृषि पर निर्भर है | उद्योगो को चलाने के लिए जिस कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है, वह हमेखेतो से प्राप्त होता है, और यही से कृषि उद्योग का आरम्भ होता है | कृषि आधारित उद्योगो से किसान अपनी आय में सुधार ला सकते है | मध्यस्थ किसान उद्योग के अलावा परिवहन/ मजदूर/ बाजार/ आड़ती/ दुकानदार जैसे रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते है | देश में कृषि उद्योग रोजगार का एक अन्य क्षेत्र बन गया है, तथा आगे यह और भी विस्तृत हो सकता है | कृषि उपज गुण, रंग, स्वाद और आकार में परिवर्तित करके कृषि मूल्य का संवर्धन किया जाता है, तथायही समर्थन कृषिउद्योग कहलाता है |

कृषि पर आधारित उद्योग कौन कौन से हैं (Agriculture/Agro Based Industries)

कृषि आधारित उद्योग एक तरह का ऐसा उद्योग है, जिसमे कच्चा माल किसान के खेतो से आता है | इसमें चीनी के लिए गन्ना, सूती वस्त्र के लिए कपास, तेल के लिए तिलहनी फसलें तथा जुट के लिए पटसन आदि उद्योग के लिए कच्चामाल किसान अपने खेत से निर्यात करता है | यहाँ पर आपको कृषि आधारित उद्योगो के नाम बताए जा रहे है:-

  • चीनी उद्योग |
  • सूती वस्त्र उद्योग/ कपड़ा उद्योग |
  • वनस्पति तेल उद्योग |
  • रबर उद्योग |
  • दुग्ध व्यवसाय |
  • कृषि यंत्र उद्योग |
  • खाद बीज उत्पादन उद्योग |
  • पशु आहार / खाल उद्योग |
  • कृषि जींस उद्योग जैसे :- पापड़, आटा, दलिया, सोस, शक्कर, पाउडर, चिप्स, अचार, गुलकंद, जेली, मिर्च-धनिया, घी/पनीर/मक्खन, और शरबत |

सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry)

कपड़े के कुल उत्पादन क्षेत्र में सूती कपड़े का योगदान तक़रीबन 70% है | भारत के मुंबई शहर में सबसे पहले पारसी उद्यमियों द्वारा सूती कपड़े की मील स्थापित की गई थी | अहमदाबाद में भी सूती वस्त्र की मील स्थापित है, किन्तु यह आकार में छोटी है, लेकिन सूती वस्त्र उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादित होता है | इसमें कच्चे माल की पूर्ती गुजरात एवं महाराष्ट्र में उत्पादित क्षेत्रों से की जाती है |

ऊनी कपड़ा उद्योग (Woolen Textile Industry)

भारत में पहली ऊनी कपड़ा मिल ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1876 में कानपुर शहर में स्थापित की गई है, क्योकि ब्रिटिश सेना का मुख्य केंद्र कानपुर में था| लेकिन भारत में अल्प शीतकात और तंवे ग्रीष्म काल जलवायु और अपर्याप्त मांग के चलते पनप नहीं पाया, साथ ही उत्पादित ऊनी कपड़े की गुणवत्ता भी निम्न थी| स्वतंत्रता के पश्चात् ऊनी उद्योग मील को एक निर्यातोन्मुखी उद्योग के रूप में विकसित किया गया |

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जूट उद्योग (Jute Industry)

देश की पहली आधुनिक जूट मिल को कलकत्ता के रिशरा में वर्ष 1855 में स्थापित किया गया था, तथा वर्ष 1859 में जूट की इस मील में कटाई और बुनाई का काम शुरू हो गया था | स्वतंत्रता के पश्चात् इस उद्योग की निर्यातोन्मुखी उद्योग के रूप में काफी वृद्धि हुई | किन्तु 80% जूट का उत्पादक क्षेत्र बांग्लादेश में चले जाने के कारण देश में जूट उद्योग को विशेष चुनोतियो से गुजरना पड़ा | इस समस्या से निपटने के लिए जूट एवं मेस्टा उत्पादन के क्षेत्रों का विस्तार किया गया | जूट के उत्पाद में रस्सी, बोरा, थैते और कालीन शामिल है, तथा अब रोधक, प्लास्टिक फर्नीचर और विरंजन रेशो का निर्माण किया जाता है | वर्तमान समय में भारत जूट उत्पादक और निर्यातक का दूसरा सबसे बड़ा देश है, इससे देश के तक़रीबन 40 लाख लोगो को रोजगार मिल रहा है | जिसमे 4 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर्मचारी भी शामिल है |

चीनी उद्योग (Sugar Industry)

भारत में प्राचीन काल से ही चीनी का उत्पादन किया जा रहा है, किन्तु चीनी उद्योग की पहली विकास यात्रा 20वी शताब्दी के पहले दशक से ही आरम्भ हो हुई | चीनी उद्योग के मामले में भारत दूसरा सबसे बड़ा कृषि उपज वाला देश है | इसका कच्चामाल गन्ने के रूप में होता है, जिसकी कुछ विशेषताए इस प्रकार है:-

  • यह कच्चा माल तेजी से वजन खो देता है |
  • लंबे समय तक भंडारित नहीं कर सकते है, क्योकि इससे सुक्रोज की हानि हो जाती है |
  • इस कच्चे माल को लंबी दूरी पर नहीं ले जा सकते है, क्योकि इसमें परिवहन की लागत काफी अधिक आ जाती है, साथ ही सूखने की आशंका भी बनी रहती है |

चर्म उद्योग (Leather Industry)

इस उद्योग में चमड़े को भेड़ की खाल से प्राप्त करते है | तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल देश में गौ पशु खाल उत्पादक के सबसे बड़े राज्य है | मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी चमड़े का मुख्य उत्पादन किया जाता है | चमड़े से निर्मित जूता निर्माण के केंद्र आगरा, लखनऊ, कानपुर, मुंबई, जयपुर, कोलकाता, जयपुर, बंगलौर और चेन्नई में स्थित है |

कृषि आधारित सबसे बड़ा उद्योग (Agro-Based Largest Industry)

कपड़ा उद्योग भारत का कृषि आधारित सबसे बड़ा उद्योग है, जो भारत का सबसे बड़ा उद्योग भी है| भारत में कपड़ा उद्योग कुल औद्योगिक उत्पादन में तक़रीबन 20 फीसदी हिस्सेदारी रखता है, तथा देश के तक़रीबन 20 मिलियन से भी अधिक लोग इस रोजगार से जुड़े हुए है | इसका कुल निर्यात लगभग 33% है, जिसका वैश्विक व्यापार में 5 फीसदी योगदान शामिल है |

कृषि उद्योग लोन कैसे प्राप्त करे (Agriculture Industry Loan)

कृषि उद्योग को बढ़ाने तथा कृषि आधारित उद्योग की स्थापना करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारे कई तरह की योजनाओ का संचालन करती है | इसमें आप अपने उद्योग से संबंधित योजना में आवेदन कर लोन ले सकते है | MSME मंत्रालय के जरिये सरकार ऐसे उद्योगो को स्थापित करने पर अनुदान प्रदान करती है |

इसके अतिरिक्त चमड़ा उद्योग विकास योजना, क्रेडिट गारंटी निवेश योजना और खाद्य वस्तु उद्योग जैसी अनेक योजनाओ के माध्यम से उद्योग लगाने हेतु 50,000 रूपए से लेकर 10 लाख रूपए की लोन सहायता प्रदान की जाती है |

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